यह लेख ब्रह्मा के प्रतीकों को केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक, दार्शनिक और मीमांसात्मक आधार पर समझने का एक गंभीर प्रयास है। इसमें ब्रह्मा के चतुरानन रूप, कमलासन, वेद, कमंडल और माला जैसे प्रतीकों को सृजन की एक संरचित प्रक्रिया—ज्ञान, ऊर्जा, समय और क्रिया—के रूप में व्याख्यायित किया गया है। षड्दर्शन, वैदिक मंत्रों और आधुनिक विज्ञान के उदाहरणों के माध्यम से यह लेख यह स्थापित करने का प्रयास करता है कि सृष्टि कोई रहस्य नहीं, बल्कि एक समझी जा सकने वाली, नियमबद्ध और तार्किक प्रक्रिया है।
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सृष्टि का रहस्य: ज्ञान, विद्या और मीमांसा के आधार पर वैदिक प्रतीकों का वैज्ञानिक विश्लेषण
जब मैं सृष्टि, ज्ञान और चेतना के इस गहन प्रश्न में प्रवेश करता हूँ, तो…
